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मंगलवार, 30 मार्च 2010
मैथिली मेरी माँ और भोजपुरी मौसी है-पद्मश्री प्रो.शारदा सिन्हा.
शारदा सिन्हा ना केवल बिहार बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और विश्व भर में जहां कहीं भी हमारे गिरमिटिया पूरबिया कौम है उनके लिए एक पारिवारिक सदस्य सरीखा नाम है.शारदा सिन्हा नाम सुनो तो लगता है अड़ोस-पड़ोस की बुआ,ताई,या मौसी है.ये मैं नहीं कह रहा बल्कि उन अनेक सज्जनों ,छात्रों से सुन चुका हूँ जो भोजपुरी से परिचित हैं और जिनके लिए भाषा का प्रश्न उनकी अपनी संस्कृति से गुजरना होता है चाहे वह इस दुनिया के किसी भी छोर पे हों.पटना से बैदा बोलाई द हो नजरा गईले गुईयाँ/निमिया के डाढी मैया/पनिया के जहाज़ से पलटनिया बनी आईह पिया इत्यादि कुछ ऐसे अमर गीत हैं जिन्होंने शारदा जी के गले से निकल कर अमरता को पा लिया.कला सुदूर दरभंगा में भी हो तो पारखियों के नज़र से नहीं बच पाती,राजश्री प्रोडक्शन वालों ने जब अपनी सुपरहिट फिल्म 'मैंने प्यार किया'के एक गीत जो की लोकधुन आधारित था को गवाना चाहा तो मुम्बई से हजारों किलोमीटर बैठी शारदा जी ही याद आई.इस फिल्म के अकेले इस गीत'कहे तोसे सजना तोहरी सजनिया'के लिए दसियों बार देखी गयी थी.
मेरे पिताजी जो भोजपुरी फिल्मों के(८०-९०के दशक की फिल्में)तथा भोजपुरी लोककलाओं के बड़े रसिक हैं एक बार छत के गीत 'केरवा जे फरेला घवध से ओईपर सुगा मेड़राये/पटना के पक्की सड़किया/कांचही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाये...आदि सुनते हुए बोले-"शारदा सिन्हा के आवाज़ में हमनी के परिवार के मेहरारू लोगिन के आवाज़ लागेला"-उनके कहने का तात्पर्य था-'शारदा सिन्हा की आवाज़ में भोजपुरिया पुरखों की आवाज़ गूंजती है.
पिछले २८ मार्च को प्रगति मैदान नयी दिल्ली के हंसध्वनी थियेटर के मंच से मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सौजन्य से इस अज़ीम शख्सियत से रूबरू होने का मौका मिला.यहाँ पर उन्होंने गायन से पहले अपने संबोधन में कहा-मैं पैदा मिथिला में हुई.मैथिली मेरी माँ है और भोजपुरी मेरी मौसी.वो कहते हैं ना कि'मारे माई,जियावे मौसी' यानी इन दोनों भाषाओँ की सांस्कृतिक दूत की सच्ची अधिकारी की इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि शारदा सिन्हा जी को कोई भी भोजपुरिया ये नहीं कह सकता कि वह उनकी अपनी नहीं है.उनके सुनते हुए आज भी वही कसक वही ठसक वही खांटी घरेलूपन उतनी ही गहराई से बरकरार है. भारत सरकार से शारदा सिन्हा जी को 'पद्मश्री'देकर सम्मानित किया है.इतना ही नहीं प्रो.शारदा जी मिथिला यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग में भी हैं.मैंने पहली बार शारदा जी को सुना/देखा अहसास नहीं हुआ कि वाकई यही शारदा जी हैं जो पूरे भोजपुरियों कि खास अपनी ही हैं.हालाँकि मैथिली गीतों में भी इनकी पर्याप्त ख्याति है पर शायद संख्या अधिक होने की वजह से इन्होने भोजपुरिया समाज के विशाल परिवार में अपनी जबरदस्त पैठ बनायीं है.मैं सोचता हूँ आखिर कोई कैसे इतना अपना हो सकता है कि ना मिले हुआ भी घरेलु हो और जिनके बिना एक संस्कार पूरा ना हो,यह तो कोई मिथकीय चरित्र ही है जो बरबस ही हमारी गोदी में आ गिरा.शारदा सिन्हा जी भोजपुरी गीत संगीत की उस परंपरा की ध्वजवाहक हैं जो भड़ैतीपने से दूर लोक की ठेठ गंवई अभिव्यक्ति है.सच ही तो है -'पद्मश्री प्रो.शारदा सिन्हा जी की आवाज़ सच्चे अर्थों में हमारे पुरखों (यहाँ मैं साफ़ कर दूं कि पुरखों से तात्पर्य भोजपुरियो-मैथिलियों की नारियां)की आवाज़ है.हम खुशनसीब हैं कि शारदा जी हमारी मिटटी में पैदा हुईं'-
रविवार, 10 जनवरी 2010
दिल्ली में होखे जा रहल बा विश्व भोजपुरी सम्मलेन
दुनिया भर में पसरल भोजपुरिहन के संख्या बीस करोड़ से बेसी बावे, आ ऊ जहँवे बाड़न तहँवे अपना भाषा संस्कृति का साथे जुड़ल बाड़े. आज जब दुनिया के सैकड़न भाषा मृतप्राय हो गइल बा, भोजपुरी तेजी से फरत फुलात बिया. एकर साहित्य आ सिनेमा दुननो दिनेदिन बढ़ले जात बा आगा. अमेरिका में कुछ सरकारी नौकरी खातिर भोजपुरीओ जानल जरुरी बा. मारीशस में एकरा के मान्यता मिल चुकल बा, ट्रिनिडाड टोबेगो, सूड़ीनाम फिजी वगैरह देशन में एकर प्रचार प्रसार तेजी से हो रहल बा. बाकिर अपने देश में एकरा ऊ जगहा नइखे मिल पावत जवना के ई हकदार बिया.
भोजपुरी के अनदेखी से नाराज पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह के कहनाम बा कि भोजपुरी के संविधन का आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के माँग ले के पूर्वांचल एकता मंच का तरफ से 9 आ 10 जनवरी 2010 के दादा देव मेला ग्राउंड, द्वारका, सेक्टर-8, दिल्ली में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन करावल जा रहल बा. दू दिन का एह सम्मेलन में देश-विदेश के हजारन भोजपुरिया शामिल होखे जा रहल बाड़े.
सम्मेलन में भोजपुरी भाषा-साहित्य आ संगीत के रंगारंग कार्यक्रमन का माध्यम से विश्व समुदाय आ भारत सरकार के धेयान एह तरफ खींचल जाई कि संविधान का आठवीं अनुसूची में सम्मिलित होखे के भोजपुरी के दावा कतना बरियार बा. अगर ओकरा बादो एह पर सरकार धेयान ना दिहलस त हमनी का आपन संघर्ष अउरी तेज करब जा.
विश्व भोजपुरी सम्मेलन-2010 के कार्यक्रम का बारे में विस्तार से जानकारी देत पूर्वांचल एकता मच के मीडिया प्रभारी संतोष सिन्हा आ आनन्द प्रकाश बतलवले कि 9 जनवरी 2010, शनिचर का दिने सम्मेलन के उद्घाटन माननीय लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार करीहें. पूर्व केन्द्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र मुख्य अतिथि रहिहन आ पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह अध्यक्षता करीहन. दैनिक जागरण समाचार पत्र के मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर विशिष्ट अतिथि रहीहन. एह अवसर पर सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह, रविशंकर प्रसाद, जगदिम्बका पाल, राजीव प्रताप रूढ़ी, महाबल मिश्रा, जगदानन्द सिंह, रमेश कुमार, मीना सिंह, पूर्व सांसद सज्जन कुमार, विधायक धर्मदेव सोलंकी, मुकेश शर्मा, सत्यप्रकाश राणा वगैरह अनेके अतिथि सम्मेलन के संबोधित करीहें.
सम्मेलन के अगिला सत्र में एगो साहित्यिक संगोष्ठी होखी जेकर विषय रही - भोजपुरी गद्य साहित्य की विकास-यात्रा. संगोष्ठी के उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र करीहें. दूरदर्शन, दिल्ली में अधिकारी आ साहित्यकार डॉ. अमर नाथ अमर मुख्य अतिथि रहीहन. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव संगोष्ठी के अध्यक्षता करीहन. एह सत्र में त्रिनिदाद के स्कॉलर डॉ. पेंगी मोहन, मॉरिशस के सोमदत्त दौलतमन, हीरा जयगोविंद, अंबिका मनवोदे आ देश-विदेश के अलग अलग जगहा से आइल विद्वान डॉ. जयकान्त सिंह 'जय´, डॉ. शत्रुघ्न सिंह, डॉ. बृजभूषण मिश्रा, डॉ. जौहर शाफियाबादी, डॉ. जनार्दन सिंह, मनोज श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार तिवारी वगैरह भोजपुरी गद्य साहित्य का विकास पर आपन राय रखीहें.
साहित्यिक संगोष्ठी का बाद भोजपुरी कवि सम्मेलन होखी जवना के उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. केदारनाथ सिंह करीहें. साहित्यकार गुरूशरण सिंह मुख्य अतिथि रहीहे आ डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना अध्यक्षता करीहें. कवि सम्मेलन में प्रो. सुभाष यादव, डॉ. सुनील कुमार पंकज, सुरेश गुप्ता, मनोज भावुक, संतोष सिनहा, मैनावती देवी, संतोष पटेल, जितेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र राय, गुरुविन्दर सिंह वगैरह कविता पाठ करी लोग. तवना बाद सुप्रसिद्ध रंगकर्मी महेन्द्र प्रसाद सिंह का निर्देशन में लोटकी बाबा के रामलीला नाम के भोजपुरी नाटक के मंचन कइल जाई.
एही सत्र में सुर-संग्राम के सितारे नाम के सांस्कृतिक-संध्यो आयोजित कइल जाई जवना में भोजपुरी चैनल महुआ टी.वी. के रियलिटी शो सुर-संग्राम के प्रमुख कलाकार मोहन राठौर, आलोक कुमार, आलोक पाण्डेय, अनामिका सिंह, विजयेता गोस्वामी, रामाशीष बागी वगैरह आपन गीत-संगीत प्रस्तुत करीहें.
विश्व भोजपुरी सम्मेलन का दुसरका दिने 10 जनवरी रविवार के एगो परिचर्चा आयोजित कइल जाई जवना के विषय होखी - दिल्ली के विकास में पूर्वाचलवासियों का योगदान. परिचर्चा के उद्घाटन बिहार भवन के एडिशनल कमिश्नर के.राम करीहन. मुख्य अतिथि रहीहन विन्देश्वरी दूबे आ अध्यक्ष सियाराम पाण्डेय. एह इस परिचर्चा में दिल्ली के हर कोना से भोजपुरी आ पूर्वांचल के प्रचारक भाग लीहें. एह कार्यक्रम में पूर्वाचल एक्सप्रेस के संपादक कुलदीप श्रीवास्तव के अलंकृत कइल जाई.
परिचर्चा क बाद भोजपुरी गीत-संगीत क रंगारंग कार्यक्रम होखी जवना में कुमार शानू, मनोज तिवारी, रविकिशन, मालिनी अवस्थी, शर्मिला पाण्डेय, तरुण तुफानी, सीमा तिवारी, संगीता यादव आ महुआ टी.वी. के अनेके कलाकार आपन प्रस्तुति दीहें. एह सत्र में दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मुख्य अतिथि रहीहें आ अध्यक्षता करीहें भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे. सुप्रसिद्ध अभिनेता आ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा आ पी.के. तिवारी के भोजपुरी गौरव सम्मान आ इण्डियन हास्पीटल के चेयरमैन डॉ. राजेश सिंह के पूर्वांचल गौरव सम्मान दीहल जाई. कार्यक्रम में आर.पी.एन. सिंह मंत्री, भारत सरकार, जय प्रकाश अग्रवाल सांसद, जगदिम्बका पाल सांसद, संजय निरूपम सांसद, सज्जन कुमार पूर्व सांसद, रमेश कुमार सांसद वगैरह लोग विशिष्ट अतिथि रही.
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विषय सूची.
* भोजपुरी सरोकार
* भोजपुरी साहित्य आ संस्कृति विषय पर गोष्ठी
(anjoria.com से साभार/सभे भोजपुरिया लोग खातिर
@अधिक से अधिक संख्या में भाग लेके सम्मलेन के सफल बनाईं लोग. )
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